kavita

asato ma sadgamaya

139 Posts

14223 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2387 postid : 595738

हिंदी ब्लॉगिंग ‘हिंग्लिश’ स्वरूप को अपना रही है। क्या यह हिंदी के वास्तविक रंग-ढंग को ���िगाड़ेगा या इससे हिंदी को व्यापक स्वीकार्यता मिलेगी?.....contest

Posted On: 8 Sep, 2013 Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं है | एडमिन को बधाई देती हूँ की उन्होंने उपरोक्त विषय को चुना | बहुत ���ठिन है हिंगलिश के स्���रूप के बारे में बात करना और बहुत आसान है हिंगलिश में टाईप कर के राय जाहिर करना | मै��� क्या ये सभी को पता है की हिंदी टाइपिंग का ज्ञान सबको न���ीं ह������ा ह��� | इसक��� लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्��������ता होती है | ऐसे में हिंगलिश स्वरुप को अपनाने म���ं मुझे कोई आपत���ति नज������ नहीं आती | बल्कि �����ि���ने क���  ये तरीका आसान व ���र्वग्रा���्य है | हालांकि कुछ अक्षरों को लिखना कभी कभी मुश्���िल हो जाता है पर आशय को समझाने में फिर भी सक्षम हो जाते है |

आज भी हिंदी पाठकों की कमी नहीं है | कभी कभी हिंदी किताबों की अनुपलब्धता पाठकों को निराश कर देती है | ऐसे में ये आभासी दु�����िया मानो हिंदी पाठकों के लिए वरदान है जहां पर हिंदी सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है फिर चाहे वो साहित्य से सम्बंधित हो ���ा सूचना से | म�����रा तो मानन��� या है की ‘हिंग्���िश’ स्वरूप को कार्यालयों में ���ामील कर ���ेन��� चाह�����ए जिससे हिंदी में कार्य ���रने के इच्��������क कर्मचारी हिं���ी ���ें आसान��� से क������ कर सके |

���िंदी की वास्तव���कता क��� बिगड़ने या स���वारने का जिम्मा केवल रचनाकार पर होता है | माध्���म चाहे ���ोई भी हो लिखने की कला ही ������सी रचना को ऊपर उठाता है या धराशायी करता है | आज हम हिंगलिश स्वरुप की वजह से लिख���े में एक स्���तन्त्रता का ���नुभव करते है | अपने व���चारों को आसानी से प्रकट कर सकते है | अब हमें किसी प्रशिक्षित टंकक के सहारे बैठना नहीं पड़ता | ���्या ये हि���गलिश स्वरुप ���े बिना स���्भ��� हो पाता? हाँ एक बात अवश���य है की इसमें अभ��� सुधार की आवश्यकता है | कभी कभी शब्दों क��� लिखने की असफ���ता के कारण वा���्य म�����ं बदलाव क���ने पड़���े ���ै | जिस���े वाक्य ���ी गरिमा घट जा���ी ह��� | इसमें निरंतर सु���ार की आवश्यकता ह��� और जानकार���ं से ये अपेक्षित ���ी है |

���������ा व्यक्तिगत अनु���व य��� ���हता है की हिं���ी ब्लोगिंग में ‘हिंगलिश’ स्वरुप मील का पत्���र साबित होगा | बड़े ���ड़े ���ाम���ीन लेखको����� ���े लेकर न���ान्तुकों ने इस वि���ा को ���ड़े आसानी से अपना ���िया ���ै |इससे न केवल एक ���िक���षित समाज का निर्माण होग��� बल���कि ये समाज की बुराइओ को उख���ड़ फेंक���े मे��� ��������ायक सा���ित होगा |हिंदी वह भाषा है जो भारत में मातृभाषा र���पी विभिन्न फूलों को एक सूत्र मे��� पिरो क��� भारत माता के गले के हार का सृ���न करती है |

सफल ल���खक प्रेरणा के लिए अवसरों को खोजते नह���ं बैठते��� वे तय समय पर नियमित र���प से कलम ���ाग़ज़ ���ा क��������्यूटर पर लिखने बैठ���े हैं।और अक्सर तब हिंगलिश को ही माध्�����म बनाया जाता है। यह हर भारतीय, देश-विदेश के हिंदी प्रेमियों, विद्वानों और शिक्षकों के लिए गर्व की बात है। ऐसे में ब्लोगोंग ���ें अगर हिंगलिश स्वर���प को अपनाय��� जा रहा है तो इस���ें बुरा क्या है ?इससे हिंदी ���ास्तविक रंग ढंग में क���ई गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा ये ���ेरा दृढ सोच है |

सुरसरि सी सरि �����ै कहाँ मेरु स���मेर समान।
�����न्म���ू���ि सी भू नहीं भूमण्डल में आन।।

प्रत���दिन पूजें भाव से चढ़ा भक्ति के फूल���
नहीं जन्म भर हम सके जन्���भूमि को भूल।।

‘हरिऔध’ जी ������ ल���खी हुई ये धारदार पं���्���ियाँ को पढने के लिए आज ���िसी प���स्�����क भण्डार के सहारे बैठ���ा नहीं पड़ता स��� कुछ आ���ासी दुनिया में उपलब्ध है | और ये केवल ‘हिंग्लिश’’ टंकण के कारण ही सम्भव हुआ है |

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

45 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kathy के द्वारा
July 12, 2016

This inh’tsgis just the way to kick life into this debate.

ushataneja के द्वारा
October 3, 2013

अनामिका जी, शॉर्टलिस्टेड प्रतिभागियों की सूची में नामित होने के लिए बधाई|

    anamika के द्वारा
    October 4, 2013

    आपका हार्दिक धन्यवाद

    Delonte के द्वारा
    July 12, 2016

    And I thought I was the sensible one. Thanks for setting me strgtahi.

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
September 13, 2013

सत्य वचन अनामिका जी

    anamika के द्वारा
    September 14, 2013

    शुक्रिया सत्यशील जी…..मेरे और ब्लॉग पोस्ट पर भी पधारें

yogi sarswat के द्वारा
September 13, 2013

सार्थक लेखन

    anamika के द्वारा
    September 14, 2013

    धन्यवाद् योगी जी

jlsingh के द्वारा
September 13, 2013

मेरा व्यक्तिगत अनुभव ये कहता है की हिंदी ब्लोगिंग में ‘हिंगलिश’ स्वरुप मील का पत्थर साबित होगा | बड़े बड़े नामचीन लेखकों से लेकर नवान्तुकों ने इस विधा को बड़े आसानी से अपना लिया है |इससे न केवल एक शिक्षित समाज का निर्माण होगा बल्कि ये समाज की बुराइओ को उखाड़ फेंकने में सहायक साबित होगा | – सही सोच …आदरणीया अनामिका जी आपके अंतिम पैराग्राफ की कुछ पंक्तिया – लगता है किसी पुराने लेख से ली गयी है – नहीं? यथा – यह हिंदी और भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए बहुत गर्व का विषय है कि “हमारे प्रधानमंत्री हिंदी के सर्वश्रेष्ठ वक्ता हैं, सहृदय कवि हैं तथा उन्होंने विश्व हिंदी सम्मेलन के लिए एक अच्छी राशि को मंजूरी दी है। इतना ही नहीं हमारे विदेश राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह का बयान कि सरकार हिंदी के संयुक्त राष्ट्रसंघ की भाषा बनने पर सौ करोड़ रुपये खर्च करेंगे तथा सरकार दूसरे देशों से सहयोग लेने के लिए लाबी कार्य भी करेगी।”

    anamika के द्वारा
    September 14, 2013

    आपने कहा मुझे गलती का अहसाह हुआ ……सुधर करने हेतु धन्यवाद्

    anamika के द्वारा
    September 9, 2013

    आप सहमत जानकर अच्छा लगा…….शुक्रिया

seemakanwal के द्वारा
September 8, 2013

सही कहना है आपका .धन्यवाद .

    anamika के द्वारा
    September 9, 2013

    शुक्रिया जी

September 8, 2013

sahi soch

    anamika के द्वारा
    September 9, 2013

    धन्यवाद् आपका


topic of the week



latest from jagran