kavita

asato ma sadgamaya

139 Posts

14223 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2387 postid : 580270

अके���े चले थे......

Posted On: 13 Aug, 2013 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अकेले चले थे , त��������������� स���़र था
म���साफिर �����������������ि���े ������… र������े��� ज������ा थ���
���������बी सी सड़कें और दिन पिघले-पिघले
तन्हाई के जाने ये आलम कौन सी ?

पे���़ों ���े कतारों की बीच की पगडण्डी
कब से न जाने खड़ी है अकेली
स���नसा��� राहें… न क़दमों ���ी आहट
इंतजार है उसको भी ��� ज���ने किसकी !!

बस सूख����� पत्तों की ग�����रने की आहट
���ारिश की टप-टप चिड़ियों की चहचहाहट
दाखिल हो जाता हूँ अक्सर इस सफ़र में
है झींगुर के शोर औ पत्तों की सरसराहट !!

कब तक मैं समझाऊँ इस तन्हां दिल को
नज्मों से बहलाए – फुसलाये पल को
तन्हाई का साथ छुडाना जो चाहूँ
भी�����़ अजनबियो����� का नहीं भाता है मन को !!

ग��� कोई बिख���ी सी न���़्म मिल जाए
क���रन-ए -���्व�����व पर पैर पड़ जाए
बज़������������-ए-याद स��� कुछ यादें द���क जाए
���नहा जीने �����ा फि��� सबब मिल जा��� !!



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

45 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Gracelyn के द्वारा
July 11, 2016

Surnirsipgly well-written and informative for a free online article.

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 21, 2013

कब तक मैं समझाऊँ इस तन्हां दिल को नज्मों से बहलाए – फुसलाये पल को तन्हाई का साथ छुडाना जो चाहूँ भीड़ अजनबियों का नहीं भाता है मन को !! गर कोई बिखरी सी नज़्म मिल जाए कतरन-ए -ख्वाव पर पैर पड़ जाए बज़्म-ए-याद से कुछ यादें दरक जाए तनहा जीने का फिर सबब मिल जाए !! बहुत ही खुबसूरत रचना .बेहतरीन रचना के लिए आपको बधाई. नमस्कार.

    anamika के द्वारा
    August 25, 2013

    तहे दिल से शुक्रिया

Ravinder kumar के द्वारा
August 18, 2013

अनामिका जी, सादर नमस्कार. गर कोई बिखरी सी नज़्म मिल जाए कतरन-ए -ख्वाव पर पैर पड़ जाए बज़्म-ए-याद से कुछ यादें दरक जाए तनहा जीने का फिर सबब मिल जाए !! पंक्तियाँ दिल को भा गई. बेहतरीन रचना के लिए आपको बधाई. नमस्कार.

    anamika के द्वारा
    August 18, 2013

    ख़ूबसूरत टिपण्णी के लिए शुक्रिया

sonam saini के द्वारा
August 18, 2013

कब तक मैं समझाऊँ इस तन्हां दिल को नज्मों से बहलाए – फुसलाये पल को तन्हाई का साथ छुडाना जो चाहूँ भीड़ अजनबियों का नहीं भाता है मन को !! गर कोई बिखरी सी नज़्म मिल जाए कतरन-ए -ख्वाव पर पैर पड़ जाए बज़्म-ए-याद से कुछ यादें दरक जाए तनहा जीने का फिर सबब मिल जाए !! बहुत ही खुबसूरत रचना अनामिका जी …..

    anamika के द्वारा
    August 18, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया

vaidya surenderpal के द्वारा
August 17, 2013

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण कविता…

    anamika के द्वारा
    August 18, 2013

    जी शुक्रिया

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 16, 2013

नज्मों से बहलाए – फुसलाये पल को तन्हाई का साथ छुडाना जो चाहूँ भीड़ अजनबियों का नहीं भाता है मन को !! गर कोई बिखरी सी नज़्म मिल जाए कतरन-ए -ख्वाव पर पैर पड़ जाए बज़्म-ए-याद से कुछ यादें दरक जाए तनहा जीने का फिर सबब मिल जाए !! आदरणीया अनामिका जी ..अजब सी कशिश है इस खूबसूरत नज्म में ..अच्छे भाव ..सुन्दर प्राकृतिक चित्रण भी भ्रमर ५

    anamika के द्वारा
    August 18, 2013

    बहुत बहुत धन्वाद ….आभार

harirawat के द्वारा
August 14, 2013

अनामिका जी, बहुत ही दिलकस नज्म है ! पढ़ते जाओ जैसे निर्मल स्वच्छ दरिया की धारा के साथ अनंत यात्रा में ! पता ही नहीं चला कहाँ आगया ! बधाई !

    anamika के द्वारा
    August 14, 2013

    धन्यवाद् आपका

    Jennabel के द्वारा
    July 12, 2016

    I am thankful for my amazing support system of family and friends who help me keep going each day. I am thankful for all the books written that help fill my creative energy and thusthgo. It helps me escape reality, which we all need at times. And I am thankful to live in a nation full of caring people, where we all can be equal.


topic of the week



latest from jagran