kavita

asato ma sadgamaya

139 Posts

14223 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2387 postid : 378

धन्य ह���ई ���ै

Posted On: 15 Jul, 2012 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आजन्म संगति की अप���क्षा प्रिये-

गुण–दोषों सहित स्वीकार्य

हुई हूँ–धन्य हुई मै ,

खींचा है आपके प्रेम ने मुझे

सींचा है आ���ने  सपनो को मेरे

���्रेम की ये परिभाषा

आपने है सिखाया

प्���िये ! हमारा अस्तित्व इ���

दुनिया म���ं रहेंगे क���यामत तक

शपथ है मेरी मै  न जाऊंगी

रह न पाऊँगी

देखे बिना आपके एक झलक

सात जन्मो से �������ंधी हूँ म���

आगे सात जन्मो तक

सात फेरे के बंधन है

मै न जाऊंगी

त���ड़कर ���े बंध�������

प्राण न्योछावर है आप पर

आप���े ही सीखा है

प्रेम की परिभाषा

धन्य हुई मै ।।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

9 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ziggy के द्वारा
July 12, 2016

Well maicaamda nuts, how about that.

Mohinder Kumar के द्वारा
July 18, 2012

अनामिका जी, प्रेम में कल्पनायें और स्वप्न एक ही रंग में रंग जाते है..कोई दूरी नहीं रहती. प्रेम एंव समर्पण के मधुर भाव लिये रचना के लिये बधाई… लिखते रहिये.

Chandan rai के द्वारा
July 17, 2012

अनामिका जी , आपका प्रेम समर्पण का खुलुसपन आपकी कविता में भी झलकता है ! अत्यंत मनोहर रचना !

July 16, 2012

बहुत सुन्दर

    Zabrina के द्वारा
    July 12, 2016

    and if it is unavoidable, find ways in which the stress can be relieved aside from extceise.Gerting fit and staying young is on the mind of many people these days, thanks to many anti-aging ca…le enough to follow. One thing that should always be a top priority is to follow a diet that is in


topic of the week



latest from jagran