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मुद्दत हुए

Posted On: 14 Dec, 2011 में

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मुद्दत हुए हाल-ए-दिल
तुमसे बयान किये हुए
फुर्सत में,तन्हाई में
लम्हें ढूँढ़ते हुए

इश्क-सागर की गहराई
नापने चली थी मैं
पर तुम मिले -
गीली रेत पर कदमों के
निशाँ ढूँढ़ते हुए

आईने में अपना ही चेहरा
पराया सा नज़र आया
चंद भींगे लम्हों को मैंने
तकिये में है दबाया

मुद्दत हुई चाँद से
चंद बातें किये हुए
तारों की सरजमीं पे
रौशनी से नहाते हुए

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367 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anamika के द्वारा
December 16, 2011

आप सबका हार्दिक शुक्रिया ……आशा है आगे भी यूं ही आपका प्यार बरकरार रहेगा……एक बार फिर से शुक्रिया

December 15, 2011

बहुत सुन्दर कृति.. सादर..!

sadhana thakur के द्वारा
December 15, 2011

बहुत खूब अनामिका जी ,अच्छी लगी रचना ,,,,,,

krishnashri के द्वारा
December 15, 2011

महोदया, जिस तरह चित्र कला में “स्केचिंग ” होती है, वैसे ही आपने अपने भावों को उकेरा है , बधाई

minujha के द्वारा
December 15, 2011

अनामिका जी छोटी सी सुंदर भावों की रचना

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
December 14, 2011

अनामिका जी सादर अभिवादन ! एकाकी मन के आवेगों को सुन्दर शब्दों में ढालकर, सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिए आपको हार्दिक बधाई |

    Tangela के द्वारा
    July 12, 2016

    Happy Chinese New Year and Happy Va9entine&#3l;s Day to you Corra and all readers of your blog. You are so gratious in sharing your wonderful talents with all through your creations and tutorials. Yeah! Year of the Tiger. I love tigers!!! Wishing everyone all the best in this new year.

naturecure के द्वारा
December 14, 2011

आदरणीय अनामिका बहन जी सादर अभिवादन ! बहुत सुन्दर भावयुक्त रचना………….बधाई !

December 14, 2011

अनामिका जी नमस्कार ! एक भावपूर्ण और अच्छी कविता के लिए बहुत बहुत बधाई !! ऐसे ही मंच पर अच्छी रचनाएँ लाती रहे ……साभार !

    Ellyanna के द्वारा
    July 12, 2016

    Dizes tão bem: era tudo povo. Parecia outra dimensão. A gesironedade a fraternidade existiu. Eu senti-as, por momentos eu senti isso. Mas…foi tão fugaz tudo…:(

shashibhushan1959 के द्वारा
December 14, 2011

आदरणीय अनामिका जी, सादर. बहुत सुन्दर शब्द -चित्र. भाव भरी रचना.


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