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कुछ फर्क नहीं पड़ता

Posted On: 5 Dec, 2011 में

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नेता कर ले चाहे बड़े-बड़े घोटाले
पशुओ को पड़े चाहे चारों के लाले
वतन हो जाए चाहे दुश्मनों के हवाले
पर कुछ फर्क नहीं पड़ता ||

विदेशी सरकार चाहे देश को लूटे
भाषाई अखण्डता चाहे खंड-खंड टूटे
सरकारी नीति चाहे कहर बन टूटे
पर कुछ फर्क नहीं पड़ता ||

महंगाई का मार हमने सहर्ष झेला
कुटीर उद्योगों को हमने कूएं में धकेला
प्राकृतिक उपादानो को यूं ही बेकार कर दिया
पर कुछ फर्क नहीं पड़ता ||

प्रशासन नेताओं की कठपुतली बन रह गयी
दबंगों की दबंगई जनता को बेहाल कर गयी
हत्यारों लुटेरों ने आतंकियों से नाता जोड़ लिया
सुन लो देश के तथाकथित आकाओं !!!!!!!
आम जनता को फर्क पड़ता है ||

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174 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rudra के द्वारा
December 6, 2011

बहोत खूब. वैसे कवितायीं मुझे जयादा भाति नहीं हैं पर यह मुजे बहोत ही अच्छी लगी.

Santosh Kumar के द्वारा
December 6, 2011

आदरणीय अनामिका जी ,..जब जनता कि आवाज को निर्दयता से दबाकर लोकतंत्र कि आड़ में लूट तंत्र चलते हैं ,…तो फर्क पडता है ,..उनको भी पड़ेगा ,..बहुत सुन्दर रचना ..हार्दिक आभार आपका

akraktale के द्वारा
December 6, 2011

अनामिका जी, हमारे यहाँ फर्क इसलिए नहीं पड़ता क्योंकि यहाँ सब चलता है की मानसिकता है.

    Valjean के द्वारा
    July 12, 2016

    Really trttrwosuhy blog. Please keep updating with great posts like this one. I have booked marked your site and am about to email it to a few friends of mine that I know would enjoy reading..

shashibhushan1959 के द्वारा
December 5, 2011

आदरणीय अनामिका जी, सादर. भ्रष्ट नेताओं को ललकारती, समाज को नवचेतना का उद्बोधन देती इस रचना के लिए कोटिशः बधाई. . “भ्रष्टाचारी आकाओं की अब खैर नहीं है, बहा, बेटियाँ, माताएं भी जाग पड़ी हैं. घोटालेबाजों अब तो कुछ होश करो तुम, गलत-सही क्या है यह जनता जान गई है” सादर.

    shashibhushan1959 के द्वारा
    December 5, 2011

    “भ्रष्टाचारी आकाओं की अब खैर नहीं है, बहन , बेटियाँ, माताएं भी जाग पड़ी हैं.

    Lettie के द्वारा
    July 12, 2016

    Så kjempefin pynt du har fått i gave! Det er såå kos å få sånn av ungene <3Har også sånn cutter greie til pekuerpakehps, men vi plagdes litt med det, og huset ble ikke helt beint :P Ikke skjønte jeg hva den tingen med alle de små firkantene skulle brukes til. Noe jeg ser nå :P VINDU! hehe.. Goooo jul til deg og dine! Stor juleklem fra Hilde


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