kavita

asato ma sadgamaya

139 Posts

14223 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2387 postid : 308

तुम्हारी साँसों की...

Posted On: 3 Dec, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

24d82fc11e5ccb8d7b5af58cd1a2483d.th

तुम्हारी साँसों की खुशबू से
महका मधुमास इस आँगन में
पहले कभी न महका था यूं
हवा इस गीले सावन में

फूलों में भी ये मादकता
दिखी न कभी इस बगिया में
मन भी कभी न भटका ऐसे
फूलों वाली मौसम में

सूनी सी इस जीवन में जो
था रीतापन खारापन
मौसम परिवर्तन ने जैसे
अनायास भर दिया यौवन

अरुणोदय चंद्रोदय अब तो
भाता है खूब इस मन को
आसमान की नीलिमा भी
रंगीन लगता है अब तो

संध्या की इस लालिमा से
भर दूं मांग …मेरी हो तुम
शायद हवा बहती हुई
ये कथा कह दे सुन लेना तुम

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

875 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran