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asato ma sadgamaya

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घोर घनघटा.........

Posted On: 24 Aug, 2011 में

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डूबा दिन ढल गयी शाम ,रोक न पाऊँ मैं
आकाश सज गए तारों से ,कदम बढाऊँ मै

घोर घनघटा नहीं चांदनी , न रोशनी तारों की
उतावला मन बिखरा पल , उठे मन में विचारें भी

न हो ये शाम रात बदनाम , दिल बरबस तनहा
मन बेचैन…सगरी रैन कब होवे सुबहा

जाने क्या दिन का राज़ , उत्फुल्ल है मन
रोशन है जग सारा ,हुआ मन रोशन

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Seetfosselt के द्वारा
October 27, 2011

हाँ, वास्तव में .

RaJ के द्वारा
August 26, 2011

बेहतरीन रचना अनामिका जी बधाई


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