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दिल दीवाना

Posted On: 17 Aug, 2011 में

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मैं हूँ और मेरे साथ है मेरा दिल दीवाना
ये भी जालिम कभी कभी बनता बेगाना

साकिओं मैंखानो में बस तू ही तू है
ख़्वाबों की जहां में भी तेरी आरज़ू है

इस कमबख्त दिल को तूने लूट लिया
रिश्ता तुमने मुझसे आखिर जोड़ लिया

जाने किस घडी में मैं जो बना दीवाना
तुमने भी उस घडी से नाता जोड़ लिया

अब इस जालिम दिल पर मेरा बस नहीं चलता
तेरा मेरा रिश्ता जाहिर हो ही गया

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sagar के द्वारा
July 12, 2016

to have worn a ring engraved with a simple message: "This too shall pas;oqu&ts. In good times he would look upon it and be humbled; in trying times, he would look forward to better days.

abodhbaalak के द्वारा
August 19, 2011

प्रेम रास में डूबी सुन्दर कविता …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

RaJ के द्वारा
August 17, 2011

दिल तो दीवाना है दिल तो पागल है

Pooja के द्वारा
August 17, 2011

बहुत अच्छी लगी आपकी ये कविता… वाकई दिल पे किसी का भी बस नहीं चलता…


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