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चुप-चुप है.......

Posted On: 9 Aug, 2011 में

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चुप-चुप है मौन प्यार ,खिल खिल जाए बहार
जब जब होवे दीदार ,तुम बस कोई नहीं

ये क्या मौसम का हाल ,क्या है ये वक्त की चाल
क्यों है इश्क में बेहाल ,हम-तुम और कोई नहीं

कशमकश मेरे मन में,समाई हो तुम धड़कन में
टूट न जाए ये बंधन ,तेरे बगैर बस कोई नही

धरती चाँद और ये गगन ,कर दूं मैं तुझे समर्पण
सूना था दिल का आँगन ,तुम-ही-तुम कोई नही

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
August 16, 2011

अनामिका जी सच में अगर साथ में वो न हो तो ………………. सुन्दर कविता … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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