kavita

asato ma sadgamaya

139 Posts

14223 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2387 postid : 231

न जाने ………

Posted On 31 Jul, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

न जाने दिन कैसे बीतेंगे बरसात के
भीगे दिन रात और नाम ही पलके

आँखों में धुएं से सपने
ख्वाबों ने रात है बुझाये
सुलगती है आंसू नयन में
बारिश है आग लगाती

न जाने दिन कैसे बीतेंगे बरसात के
भीगे दिन रात और नाम ही पलके

तुझे दिल याद करती है
छलका के नीर नयनों में
गिले शिकवे भुलाकर दिल
संजोये ख्वाब पलकों में

ग़म में डूबा इस दिल को
बूंदों ने उबारा है
बारिश की नेह-बूंदों से
सपनों को सजाया है

सपनो को हकीक़त से
सींचने तुम आओगे
कांच की इन बूंदों से
बगिया ये महकाओगे

रिश्तों को जी लेने दो
बस नाम का रिश्ता नहीं
आ जाओ इस सावन में
रिश्तों को नाम दे दो

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran