kavita

asato ma sadgamaya

139 Posts

14223 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2387 postid : 223

तेरा आना

Posted On: 21 Jul, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

वक्त बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है
यादों के सागर में डूबना अच्छा लगता है
चुटकियों में दिन गुज़रकर शाम जो हो जाती है
तेरी यादों में तारे गिनना भी अच्छा लगता है ||

ये यादें भी बेमुरव्वत बेवफा होती है
कभी आती है तो कभी गुम हो जाती है
नफरत है तेरी यादों से जो रुला जाए बार बार
पर मरहम भी तो दिल को तेरी याद ही लगाती है ||

वजह यही है तेरी यादों को सजोने का
एक बेवफा के प्यार को ज़ुदा न करने का
रौशनी तले अँधेरा है ये मेरा दिल भी जाने
पर कोशिश है अँधेरे में दिया जलाने का ||

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 1.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atharvavedamanoj के द्वारा
July 21, 2011

आदरणीय अनामिका जी| सादर प्रणाम| यादों का क्या है जब भी मौका मिला वक्त वेवक्त आ ही जाती है, यादों का मरहम लगाना अच्छा लगा|एक सुन्दर कविता|जय भारत, जय भारती|

vikaskumar के द्वारा
July 21, 2011

अनामिका जी, बहुत ही सुन्दर कविता


topic of the week



latest from jagran