kavita

asato ma sadgamaya

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ब्लॉग-ए-आम..........

Posted On: 9 Dec, 2010 में

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दिन ढला शाम हुई
चिड़ियों की कुहक
वीरान हुई


दिन ने रात को
गले लगाया
सांझ का ये नज़ारा
आम हुई


पेड़ों की झुरमुटों से
चांदनी की छटा
दीदार हुई


तारों की अधपकी रोशनी
आसमां की ज़मी पे
मेहरबान हुई


ये तो रोज़ का नज़ारा है
जाने क्यों लिखने को
बेचैन हुई


चलो आखिर इस बहाने
मेरी ये कविता
ब्लॉग-ए-आम हुई

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Seetfosselt के द्वारा
October 24, 2011

सच में?

abodhbaalak के द्वारा
December 11, 2010

anamika ji mai to aapki is kavita ko blog e khas kahoonga, aam nahi, sundar kavita ke liye bandhaai ho

R K KHURANA के द्वारा
December 10, 2010

प्रिय अनामिका जी, चलो आखिर इस बहाने मेरी ये कविता ब्लॉग-ए-आम हुई बहुत ही अच्छी कविता ! राम कृष्ण खुराना

Wahid के द्वारा
December 10, 2010

अनामिका जी! सुन्दर कविता आपकी तरफ़ से| वाराणसी पर आलेख प्रकाशित है कृपया अवलोकन कर लें| धन्यवाद| वाहिद http://kashiwasi.jagranjunction.com

    Adele के द्वारा
    July 12, 2016

    Herlige lykter! Trenger det nÃ¥ nÃ¥r det ikke blir noe annet enn mørkere!:) Herlig blogg du har forresten! Har jo sett deg rundt om kring i det siste – gratulerer med fÃrs!teplas¸en!s! Og tusen takk for koselig hilsen hos meg i helga:) Veldig kjekt!! Finfin dag til deg!! Smil

atharvavedamanoj के द्वारा
December 10, 2010

आपकी यह कविता… देखने में आम…. लेकिन यकीं जानिये… पेड़ों की झुरमुट से तारों तक… ख़ास| बधाई हो

allrounder के द्वारा
December 10, 2010

अनामिका जी, अच्छी अभिव्यक्ति की है आपने और ये ब्लॉग आम नहीं ब्लॉग अ ख़ास बन गया है ! बधाई !


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