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मेरी गली से............

Posted On: 25 Aug, 2010 Others में

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woman
मेरी गली से जब भी गुजरीं वो
खुशबू का सैलाब सा बह गया
रूह तक पहुंची वो खुशबू-ए-उल्फत
मुहब्बत का तकाजा बढ़ गया
दिल के दामन में आकर
धूम मचाकर रख दिया
सपनो में भी चैन न आया
वो आयी और मै दीवाना हो गया
इश्क जब सर पर चढ़ा
बेवफा चिड़िया सी फुर्र हुई
अब तो ये हाल है जानम
मालूम नहीं कब दिन हुआ कब रात हुई

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jeana के द्वारा
July 12, 2016

No wonder you&7821#;re exhausted, right?! :) Don’t worry, momma, it gets better as they get older. Lots more playing (and sleeping!); lots less feeding and diaper changes, lol.

Arvind Pareek के द्वारा
August 28, 2010

आपनें ही पिछली पोस्‍ट में लिखा है :- तजुर्बा-इ-इश्क है खराब समझ लेने दो अपनी तो ज़िंदगी बस यूं ही जी लेने दो फिर भी आप लिख रही हैं इश्क जब सर पर चढ़ा बेवफा चिड़िया सी फुर्र हुई अब तो ये हाल है जानम मालूम नहीं कब दिन हुआ कब रात हुई । खैर दोनों ही रचनाएं सुंदर हैं । इसी तरह लिखते रहिए । अरविन्‍द पारीक http://bhaijikahin.jagranjunction.com

R K KHURANA के द्वारा
August 25, 2010

प्रिय अनामिका जी, इश्क जब सर पर चढ़ा बेवफा चिड़िया सी फुर्र हुई अब तो ये हाल है जानम मालूम नहीं कब दिन हुआ कब रात बहुत सुंदर R K KHURANA http://www.khuranarkk.jagranjunction.com

Ramesh bajpai के द्वारा
August 25, 2010

मेरी गली से जब भी गुजरीं वो खुशबू का सैलाब सा बह गया रूह तक पहुंची वो खुशबू-ए-उल्फत मुहब्बत का तकाजा बढ़ गया दिल के दामन में आकर ……….. सुन्दर रचना खूब सूरत भाव

syeds के द्वारा
August 25, 2010

अनामिका जी,बहुत सुन्दर लिखा आपने मेरी गली से जब भी गुजरीं वो खुशबू का सैलाब सा बह गया….. http://syeds.jagranjunction.com


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