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नज़्म

Posted On: 21 Aug, 2010 Others में

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(1)
चाँद खिला पर रौशनी नही आयी
रात बीती पर दिन न चढ़ा
अर्श से फर्श तक के सफ़र में
कमबख्त रौशनी तबाह हो गया
(2)
दिल की हालत कुछ यूं बयान हुई
कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा
राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम
न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nelle के द्वारा
July 12, 2016

We recently picked up a Red SL Rogue and we love it — we1#r2&7;8e averaging nearly 26 miles per gallon driving around town. Good bye to our gas hog Jeep Commander getting only 13 miles per gallon, hello savings!

Ramesh bajpai के द्वारा
August 24, 2010

राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला क्या खूब लिखा ……… अनामिका जी . एक बिनती करना चाहता हु अगर हो सके तो सबको जबाब जरुर लिखे

    anamika के द्वारा
    August 24, 2010

    आप को मेरी पोस्ट पसंद आयी …धन्यवाद . आपके ये प्रेरणादायक शब्द ही मुझे लिखने के लिए बल देता है .

Piyush Pant के द्वारा
August 22, 2010

बेहद उत्कृष्ट लिखा है आपने………. बधाई और शुभकामनाएं हैं………

R K KHURANA के द्वारा
August 22, 2010

सुश्री अनामिका जी, राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला सुनेर अभिवयक्ति ! मेरी शुभकामनायें राम कृष्ण खुराना

syeds के द्वारा
August 22, 2010

अनमिका जी खूबसूरत नज़्म, specially दिल की हालत कुछ यूं बयान हुई कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा syeds.jagranjunction.com

syeds के द्वारा
August 22, 2010

अनमिका जी खूबसूरत नज़्म, specially दिल की हालत कुछ यूं बयान हुई कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा

roshni के द्वारा
August 21, 2010

अनामिका जी बहुत सुन्दर नज़्म…

ashutosh के द्वारा
August 21, 2010

दिल की हालत कुछ यूं बयान हुई कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला………….बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ अन्नामिका जी आभार !!!

    anamika के द्वारा
    August 21, 2010

    तारीफ केलिए shukriya


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