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ये बचपन

Posted On: 4 Aug, 2010 Others में

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बस्तों के बोझ तले दबा हुआ बचपन

बसंत में भी खिल न पाया ये बुझा हुआ बचपन

बचपन वरदान था जो कभी अति सुन्दर

पर अब क्यों लगता है ये जनम – जला बचपन

अपनों से ही पीड़ित क्यों है आज बचपन

ये देन है किस सभ्यता का क्यों खो गया वो बचपन

वो नदियों सा इठलाना चिड़ियों सा उड़ना

वो तितलियों के पीछे वायु वेग सा दौड़ना

वो सद्य खिले पुष्पों सा खिलना इठलाना

वो रह पर पड़े हुए पत्थरों से खेलना

कहाँ है वो बचपन जो छूटे तो पछताए

क्यों है वो परेशां ये बचपन छटपटाये

खिलने से पहले ही मुरझाता

ये शोषित ये कुंठित ये अभिशप्त बचपन

o saathi re

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Precious के द्वारा
July 12, 2016

I bet Holdem Up got him a free pass to Go West, Proud Obot Pervert and supplied him with a Fast & Furious weapon from his O.o3bs&#s9; stockpile of illegal weapons heading again to Mexico to secure the illegals safe passage in time to vote in Con-paign II.

Kusum के द्वारा
December 28, 2010

बहुत सुंदर प्रस्तुति है. “खोल दो परों को उड़ने दो इस बचपन को.”

    anamika के द्वारा
    December 29, 2010

    धन्यवाद …………आपकी टिप्पणी हमारे लिए अनमोल है


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