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छोटा सा,एक रत्ती ,चूहा...............

Posted On: 24 Jul, 2010 Others में

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छोटा सा,एक रत्ती ,चूहा एक नन्हा
आँखे अभी खुली नही एकदम काना

टूटा एक दराज का जाली से भरा कोने में
माँ के सीने से चिपक कर उनकी बाते सुने रे

जैसे ही उसकी बंद आँखे खुली दराज के अन्दर
देखा बंद है कमरा उसका लकड़ी का है चद्दर

खोलकर अपने गोल-गोल आँखे देख दराज को बोला
बाप रे बाप!ये धरती सचमुच है कितना ss बड़ा

कवी सुकुमार राय द्वारा रचित कविता का अनुवाद

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ellyanna के द्वारा
July 12, 2016

Protwcuoe;b&aałem podmontować zdalny dysk sieciowy na NTFS. Niestety sypało błędem. Pogrzebałem trochę i po raz pierwszy pojawił się ten bug w 2008 roku. Na forum ubuntu 11 stron wątku ludzi z podobnym problemem. Nie wszystko działa ;)

R K Khurana के द्वारा
July 24, 2010

प्रिय अनामिका जी, आपका अनुवाद अच्छा है ! परन्तु मुझे इस लाइन का अर्थ समझ में नहीं आया ! ‘आँखे अभी खुली नही एकदम काना ‘ कृपा बताने की कृपा करें ! राम कृष्ण खुराना

    anamika के द्वारा
    July 25, 2010

    शायद मेरे अनुवाद में कमी रह गयी . यहाँ इस कविता सद्यजात चूहे की मनस्थिति का वर्णन किया गया है . जिसकी आँखों में अभी दृष्टि नही आयी . जब उसको दिखना शुरू हुआ उसको वो छोटी सी दराज ही बहुत बड़ा लगने लगा.

rajkamal के द्वारा
July 24, 2010

आपने एक साहसिक काम किया है अनुवाद करने का … लेकिन इसमें एकसारता की कमी सपष्ट झलकती है …

roshni के द्वारा
July 24, 2010

बढ़िया अनुवाद अनमिका जी ….


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