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asato ma sadgamaya

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धरा ने अपने प्रांगन में................

Posted On: 11 Jul, 2010 Others में

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धरा ने अपने प्रांगन में
निमंत्रण दिया है जन-जन को

त्रिनासन है बिछाया

तृप्त जो करना है प्रानमन को
नदी ने भी निमंत्रण सुन

समर्पित किया अपने जल को

आकाश भी आ पहुंचे लेकर

साथ पवन देव को
सूर्य और चन्द्रमा ने तो

सुसज्जित किया अपने किरण से

पवन देव ने निमंत्रण स्थल को

शीतल किया अपने बल से
मृदु भाव से पशु-पक्षी ने

अपना स्थान ग्रहण किया

ये मनोरम दृश्य  देख

तीनो लोक अभीभूत हुआ


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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Tessa के द्वारा
July 12, 2016

I could watch Scehrdlin’s List and still be happy after reading this.

aditi kailash के द्वारा
July 11, 2010

प्रकृति का सुन्दर वर्णन….

Amitkrgupta के द्वारा
July 11, 2010

अनामिका जी बेशक अच्छी रचना .लिखना जरी रखे.www.amitkrgupta.jagranjunction.com

Nikhil के द्वारा
July 11, 2010

अनामिका जी, आपकी तीनों रचनायें पढ़ीं. आप की हर कविता अपनाप मैं ख़ास है, यूँही अपनी कलम से हमारा प्यार बरक़रार रकेहीं और हमें ऐसी ही खुबसूरत कविताओं को पढ़ने का मौका देती रहे. आभार, निखिल झा

    anamika के द्वारा
    July 11, 2010

    आपको अच्छा लगा इसके लिए धन्यवाद.


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